- गिरीश गुरुरानी
आकर्षक, मोहक, एकान्त में बसा
सुंदर सा घर।
हमेशा रहेगी, मुझको है याद, बंगले की एक रात।
सुनता हूं इस घर में यदा कदा
रुकते हैं नेता, सरकारी अफसर।
आकर्षक, मोहक, एकान्त में बसा
सुंदर सा घर…..
दृष्टि में अथक, वृष्टि में पृथक
हमेशा रहेगी, मुझको है याद,
बंगले की एक रात।
उन्हें भी मिला रहने का अवसर,
विश्राम की आशा… पर…
इसके अंदर था अन्तर,
सुरा के सरोवर में,
उमंगें तरंग बनी, बनकर मिलीं
ज्वार से भाटे,
सारे समा गए दल-दल में एक साथ
हमेशा रहेगी, मुझको है याद, बंगले की एक रात।




