प्रकृति का नियम, प्रेरणा का श्रोत
गहन चिंतन, मनन, एकांत चित्त में ओत-प्रोत।
शिशु की शैशवता, परतंत्रता
विवशता के आंसुओं से यौवन उबरता।
शक्ति का संचरण,
उमड़ता तारुण्य।
गर्व, मद, स्वातंत्र्य की अनुभूति से,
क्षीर्ण तन, सुखहीन क्षीर्णा
सृष्टि को देखता,
दयनीयता की दृष्टि से।
प्रकृति के क्रम को निहारो
पतन से उत्थान,
विस्फोट से शांति।
व्यथित मन जब हो,
ह्रदय में, धैर्य की सरिता उबारो।
प्रकृति का नियम, प्रेरणा का श्रोत…..
- -गिरीश गुरुरानी




