आजादी का आंदोलन
डा. अतुल शर्मा।
खड्ग बहादुर ने महात्मा गॉंधी को अपने खून से पत्र लिखा कि मैं डांडी यात्रा मे शामिल होना चाहता हूँ , पर मुझे चर्खा चलाना नहीं आता।
गांधी ने उन्हें आज्ञा दी और खड्ग बहादुर नमक कानून तोड़ने के लिए डांडी यात्रा मे शामिल हो गये।
पुस्तकों में गाधी विचार के लोगों से डांडी यात्रा के बारे में सुना था। भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष की यह महत्वपूर्ण घटना थी।
वैसे अस्सी के दशक मे एटेंबरो की फिल्म में इस यात्रा का दृश्य रुप देखा। कुछ डाक्यूमेंट्री में भी देखा था। अपार जनसमुदाय उमड़ा था।
गांधी विचार अहिंसा जैसे व्यापक मूल्यों पर केंद्रित है, यह भी पढ़ा।
विश्व में उनकी चर्चा आज तक होती ही रहती है, यह भी मीडिया में देखा सुना और पढ़ा।
खड्ग बहादुर के द्वारा जब यह बताया गया कि देहरादून मे नून नदी के पानी में भी नमक है। यह जगह खारा खेत में है, तो उन्हें कहा गया वे वहीं नमक बनाएं।
वे और उनके साथी लौटे और नमक बनाया, जिसे देहरादून के टाउन हॉल मे बेचा गया तथा बाजार में भी। इससे नमक कानून तोड़ो सत्याग्रह आन्दोलन को बल मिला।
भक्त दर्शन के संपादन में एक लेख के अनुसार खड्ग बहादुर पर स्वाधीनता संग्राम सेनानी एवं राष्ट्रीय कवि श्रीराम शर्मा प्रेम ने एक लेख साप्ताहिक हिन्दुस्तान में लिखा था। जो खड्ग बहादुर के जीवन पर प्रकाश डालता है।
डांडी यात्रा का जिक्र आया तो ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि महात्मा गॉंधी देहरादून, मसूरी, अल्मोड़ा कोसानी स्थानों पर आये थे।
देहरादून में बालबनिता आश्रम तिलक रोड की नींव रखी और शहंशाही आश्रम में एक पौधा रोपा था। वह आज भी है, जिसके नीचे यह संदर्भ अंकित है।
डांडी यात्रा खड्ग बहादुर और खारा खेत नून नदी से जुड़ी महात्मा गॉंधी की संस्मरण यात्रा जब लोगों से सुनी तो पता चला स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी सत्य कथाएं देश के गांव शहर का हिस्सा बनी हुई हैं।
(लेखक जनकवि के रूप में विख्यात हैं)




